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Disaster Management

श्रीजन परियोजनाः इन गांवों में बर्बाद नहीं होता बारिश का पानी

जखोली ब्लाक के पाट्यौ गांव के 25 परिवार एक मात्र हैंडपंप के भरोसे थे। पानी के लिए हैंडपंप पर लगी लंबी लाइन कब कम होगी, इसके इंतजार में कई बार घर लौटना पड़ जाता था। अभी भी गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर स्रोत से पानी लाना पड़ता है। पानी का इंतजाम करना कोई आसान काम नहीं है। कोई तड़के तो कोई देरशाम हैंडपंप पानी भरने जाता है। लता बताती हैं कि गेल इंडिया ने छह घरों को रैन वाटर हार्वेस्टिंग टैंक बनाकर दिए हैं।  ये भी पढ़ें-   एजोला से पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि

इन टैंकों को एक पाइप के जरिये घरों की छतों से जोड़ दिया। बारिश का पानी घर के इस्तेमाल के लिए बचाया जा रहा है। लता के अनुसार रोजाना करीब एक घंटे हैंडपंप पर बीत रहा था। जब से वाटर हार्वेस्टिंग टैंक बना है, हम लोगों को काफी फायदा हुआ है। यह पानी घर की साफ-सफाई, जानवरों को नहलाने, पिलाने, कपड़े, बर्तन धोने और फिर क्यारियों की सींचने के काम आ रहा है। इससे हम पानी की बचत का महत्व भी जान गए। श्रीजन परियोजना ने आपदा प्रभावित गिंवाला, पाट्यौ, भीरी गांवों में पानी के संकट से निपटने के लिए रैन वाटर हार्वेस्टिंग पर जोर दिया। पाट्यौ गांव की लता, पवित्रा, सरोजिनी देवी, दीपा और शिवदेई, हेमंती देवी के घरों पर टैंक बनाए गए। इससे बारिश का पानी यूं ही बर्बाद नहीं हो रहा है। अब इन परिवारों को पानी के लिए परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। श्रीजन परियोजना क्षेत्र के गिंवाला, संसारी गांव के दो सहित कुल आठ टैंक बनाकर दिए गए हैं।